मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम (TVK) ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उसका उद्देश्य केवल NEET में सुधार नहीं, बल्कि इसे पूरी तरह समाप्त करना है। पार्टी का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया तय करने का अधिकार राज्यों के पास होना चाहिए।
TVK ने मंगलवार को जारी अपने बयान में कहा कि शिक्षा और मेडिकल प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राज्यों को अधिक स्वायत्तता मिलनी चाहिए। पार्टी के अनुसार, हर राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए एक समान राष्ट्रीय परीक्षा सभी छात्रों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हो सकती।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की पैरवी
पार्टी ने सुझाव दिया कि शिक्षा को संविधान की राज्य सूची में शामिल किया जाए, ताकि राज्य सरकारें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा और मेडिकल प्रवेश से जुड़ी नीतियां बना सकें। यदि यह प्रक्रिया तत्काल संभव नहीं हो, तो राज्यों को अधिक अधिकार देने के लिए वैकल्पिक संवैधानिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाना चाहिए।
TVK का कहना है कि इससे स्थानीय छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे और राज्य अपने शिक्षा मॉडल के अनुसार प्रवेश प्रणाली तैयार कर सकेंगे।
केवल परीक्षा नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल
पार्टी ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ाई हैं। ऐसे में केवल परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मेडिकल प्रवेश व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जरूरत है।
TVK ने दोहराया कि उसकी नीति शुरू से ही NEET को समाप्त करने और राज्यों को अधिक अधिकार देने की रही है। पार्टी का दावा है कि यह रुख छात्रों के हितों और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपनाया गया है।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
NEET का मुद्दा लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति का अहम विषय रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर इस परीक्षा को लेकर अलग-अलग राय रखते रहे हैं। TVK ने अपने बयान में बिना किसी दल का नाम लिए कहा कि शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर केवल राजनीतिक वादे करने के बजाय ठोस और व्यवहारिक समाधान तलाशने की आवश्यकता है।
विरोध प्रदर्शनों के बीच बढ़ी चर्चा
देश के कई हिस्सों में शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच तमिलनाडु में भी NEET को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता और तमिल रैपर ‘थेरुक्कुरल’ अरिवु ने भी चेन्नई में NEET के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने राज्य सचिवालय के बाहर परीक्षा के खिलाफ नारे लगाए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि NEET को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों की बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है। जहां कुछ राज्य प्रवेश प्रक्रिया में अधिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर एक समान परीक्षा को बनाए रखने के पक्ष में भी तर्क दिए जा रहे हैं।














