शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा है कि केवल ठोस राजनीतिक और सरकारी आश्वासन मिलने पर ही वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
सफदरजंग अस्पताल से जारी अपने संदेश में वांगचुक ने कहा कि उनकी प्राथमिकता किसी व्यक्ति या सरकार का विरोध नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाना है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
संसद मार्च के बाद लेंगे अंतिम फैसला
वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि उनका अनशन संसद मार्च के बाद भी जारी रह सकता है, यदि उनकी प्रमुख मांगों पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
उनका कहना है कि लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और परिवार की मेहनत लगाते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं।
शिक्षा सुधार को बताया सबसे बड़ा मुद्दा
सोनम वांगचुक ने कहा कि देश में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि छात्रों का विश्वास दोबारा कायम हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक साझा समाधान निकालना चाहिए।
अस्पताल से जारी किया संदेश
वर्तमान में वांगचुक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उन्होंने अपने संदेश में दावा किया कि उनकी आवाजाही और संवाद पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
परिवार और समर्थकों की चिंता
वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर उनके परिवार और समर्थकों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि लंबे समय से जारी अनशन का असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। समर्थकों ने सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
अदालत में भी पहुंचा मामला
इस बीच, वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने और उपचार से जुड़े मामले पर न्यायालय में भी सुनवाई हो चुकी है। अदालत ने फिलहाल चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए तत्काल हस्तक्षेप से इनकार किया है। हालांकि, परिवार आगे कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
आंदोलन का व्यापक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और शिक्षा सुधार जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा को भी आगे बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार, राजनीतिक दलों और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।














