तमिलनाडु में चुनाव परिणामों से पहले राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर हैं। इसी बीच तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के प्रमुख Vijay के लगातार मंदिर दौरे चर्चा का केंद्र बन गए हैं। तिरुचेंदूर में विशेष पूजा के बाद अब उनका शिरडी जाने का कार्यक्रम सामने आया है, जिसे चुनावी नतीजों से पहले आध्यात्मिक सहारे के रूप में देखा जा रहा है।
मंगलवार को Vijay ने Tiruchendur Murugan Temple में “चथ्रु संहारा पूजा” की। इस अनुष्ठान को परंपरागत रूप से बाधाओं को दूर करने और विरोधियों पर विजय प्राप्त करने के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान मुरुगन को युद्ध और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, और इस मंदिर का इतिहास भी विजय और संघर्ष से जुड़ा रहा है।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूजा मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है। राजनीति, व्यापार और कला जगत से जुड़े लोग कठिन समय में इस तरह के अनुष्ठान करते रहे हैं। यही कारण है कि विजय का यह कदम केवल धार्मिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब उनका अगला पड़ाव Shirdi Sai Baba Temple है, जहां वे साईं बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लेंगे। उनके इस कार्यक्रम ने समर्थकों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनाव परिणामों से पहले सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
तमिलनाडु की राजनीति इस बार काफी दिलचस्प मोड़ पर है। सत्तारूढ़ Dravida Munnetra Kazhagam दूसरी बार सत्ता में वापसी के लिए प्रयासरत है, जबकि All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam वापसी की उम्मीदों के साथ मैदान में है। इन दोनों के बीच Vijay की पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही है और सीधे सत्ता तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विजय को युवाओं और महिला मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिल रहा है। हालांकि, यह समर्थन चुनाव परिणामों में कितना बदलता है, यह देखना बाकी है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरी पार्टी के लिए यह एक बड़ी परीक्षा है।
इसी दौरान मुख्यमंत्री M. K. Stalin भी चुनावी व्यस्तताओं के बीच कुछ समय के लिए विश्राम करते नजर आए, जबकि Edappadi K. Palaniswami अपने क्षेत्र में रहकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।
नतीजों से पहले नेताओं के अलग-अलग तरीके सामने आ रहे हैं—कोई जनसंपर्क बढ़ा रहा है तो कोई आध्यात्मिक मार्ग अपना रहा है। ऐसे में विजय का यह मंदिर दौरा राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोण से अहम बन गया है।














