देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परीक्षा प्रणाली पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों ने अपने भविष्य के लिए वर्षों तक मेहनत की, लेकिन बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं ने उनके विश्वास को कमजोर कर दिया है।
मीडिया से बातचीत में थरूर ने कहा कि किसी भी परीक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता होती है। यदि छात्रों को यह भरोसा न रहे कि उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन होगा, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
“युवाओं के भविष्य की रक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी”
शशि थरूर ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और करियर पर भी असर डालती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
उनका कहना था कि दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई से ही छात्रों का विश्वास दोबारा मजबूत किया जा सकता है।
जंतर-मंतर पर छात्रों से की मुलाकात
थरूर ने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि छात्रों ने उन्हें अपनी चिंताओं और अनुभवों के बारे में बताया। उनके अनुसार, प्रदर्शन में शामिल युवाओं की सबसे बड़ी मांग निष्पक्ष जांच और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार है।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा सीधे देश के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
विपक्ष ने सरकार से मांगी जवाबदेही
पेपर लीक को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ-साथ उन अधिकारियों और लोगों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, जिनकी लापरवाही या संलिप्तता के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं।
विपक्ष का यह भी कहना है कि संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक नीति बनाई जा सके।
सरकार ने भी किए हैं बड़े ऐलान
पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार पहले ही कई कदमों की घोषणा कर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, जिससे मामलों का जल्द निपटारा हो सके और दोषियों को समयबद्ध सजा मिल सके।
सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी और कानूनी स्तर पर कई सुधार किए जा रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दोषियों को सजा देना ही पर्याप्त नहीं होगा। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।














