नई दिल्ली:
अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर किसानों के बीच बनी चिंताओं पर अमूल के प्रबंध निदेशक ने भरोसा दिलाते हुए कहा है कि भारत किसी भी समझौते में किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार वार्ताएं केवल आयात या रियायतों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि यह एक संतुलित और परस्पर लाभ की प्रक्रिया होती है।
अमूल प्रमुख ने कहा कि डेयरी क्षेत्र में करोड़ों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है और सरकार इस संवेदनशीलता को भली-भांति समझती है। इसी कारण किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले उसके संभावित प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाता है, ताकि घरेलू किसानों पर नकारात्मक असर न पड़े।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की सहकारी डेयरी व्यवस्था किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है। इस मॉडल ने न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि किसानों की आय को भी स्थिरता दी है। ऐसे में विदेशी डेयरी उत्पादों को लेकर फैल रही आशंकाओं पर घबराने की जरूरत नहीं है।
अमूल प्रमुख के मुताबिक, देश की कृषि और डेयरी नीतियां आत्मनिर्भरता और किसान कल्याण पर केंद्रित हैं। व्यापार समझौतों में भी इसी सोच को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में लिए जाने वाले फैसले किसानों के हितों को मजबूत करेंगे।
अंत में उन्होंने कहा कि किसानों और सहकारी संगठनों से लगातार संवाद जारी है और हर नीति निर्णय में किसानों की आवाज को अहम स्थान दिया जाएगा।














