फिल्म और टीवी इंडस्ट्री से जुड़ी प्रमुख संस्था FWICE (Federation of Western India Cine Employees) ने हाल ही में सामने आए ‘Ghooskhor Pandat’ नाम को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। संगठन का कहना है कि इस तरह का शीर्षक धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को आहत कर सकता है, जिससे अनावश्यक विवाद पैदा होने की संभावना है।
FWICE ने क्या कहा?
FWICE की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि किसी भी रचनात्मक कार्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। संगठन का मानना है कि ‘घूसखोर पंडित’ जैसे शब्दों का उपयोग किसी विशेष समुदाय या धार्मिक पहचान को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत कर सकता है।
शीर्षक से जुड़ी संवेदनशीलता
FWICE का कहना है कि भारत एक विविधताओं वाला देश है, जहां धर्म और आस्था से जुड़े शब्दों को बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में किसी फिल्म, वेब सीरीज या कंटेंट का शीर्षक यदि सामान्यीकरण या अपमान की भावना पैदा करता है, तो उससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
निर्माताओं से अपील
संगठन ने कंटेंट निर्माताओं और प्रोड्यूसर्स से अपील की है कि वे शीर्षक और विषयवस्तु को लेकर सावधानी बरतें और ऐसा कोई भी नाम न चुनें जिससे किसी वर्ग की भावनाएं आहत हों। FWICE ने यह भी कहा कि रचनात्मक आज़ादी का मतलब किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं होना चाहिए।
बढ़ता विवाद और प्रतिक्रिया
इस शीर्षक को लेकर सोशल मीडिया पर भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई यूज़र्स का कहना है कि धार्मिक पहचान से जुड़े शब्दों का इस तरह प्रयोग टाला जाना चाहिए।
FWICE ने संकेत दिए हैं कि यदि इस आपत्ति को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो संगठन आगे उचित कदम उठाने पर भी विचार कर सकता है। फिलहाल सभी की नजरें निर्माताओं की प्रतिक्रिया और संभावित बदलाव पर टिकी हुई हैं।
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