अमेरिका द्वारा हाल ही में टैरिफ में संभावित कटौती से जुड़े आदेश में भारत के रूसी तेल आयात को लेकर दिए गए संकेतों ने नई बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिकी बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत भविष्य में रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करेगा, हालांकि इस संबंध में दिल्ली से अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका की ओर से यह संकेत वैश्विक व्यापार और रणनीतिक समझौतों के संदर्भ में दिया गया है। इसके बावजूद भारत सरकार के पेट्रोलियम, वाणिज्य और विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है और रूस से मिलने वाला कच्चा तेल कीमत के लिहाज से अपेक्षाकृत सस्ता रहा है। ऐसे में अचानक किसी आपूर्तिकर्ता से दूरी बनाना भारत की आर्थिक योजना पर असर डाल सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत अपनी ऊर्जा नीति में संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर चलता है और किसी एक देश के दबाव में आकर फैसला लेने से बचता है। यही वजह है कि सरकार की ओर से अभी केवल हालात पर नजर रखी जा रही है।
फिलहाल, अमेरिका के बयान के बाद चर्चाएं जरूर तेज हुई हैं, लेकिन भारत की ओर से रूसी तेल आयात को लेकर किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आने वाले समय में भारत-अमेरिका वार्ता और वैश्विक हालात इस मुद्दे की दिशा तय कर सकते हैं।
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