दिल्ली पुलिस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच राजधानी में 807 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसका मतलब है कि औसतन प्रति दिन लगभग 54 लोग गायब हुए — इनमें 509 महिलाएँ और लड़कियाँ तथा 298 पुरुष और लड़के शामिल हैं। 191 नाबालिग भी इस सूची में हैं, जिनमें से ज़्यादातर किशोर लड़कियाँ थीं।
पुलिस अभी तक 235 लोगों को ढूंढ चुकी है, जबकि लगभग 572 अभी भी अनट्रेस्ड (अदृश्य) हैं।
पिछला रिकॉर्ड: क्या ये आंकड़े असामान्य हैं?
दिल्ली के पिछले सालों के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि:
2025 में कुल 24,843 लोग लापता हुए — यानी एक महीने का औसत लगभग 2,000 लापता रहा।
इसी तरह, वर्षों से यह आंकड़ा लगभग 23,000–25,000 प्रतिवर्ष दर्ज होता रहा है, जिसका मतलब है हर महीने लगभग 1,900–2,100 लोग गायब होते हैं।
अगर हम यही मासिक औसत देखें, तो 807 की संख्या अपेक्षाकृत कम लगती है, खासकर जनवरी के पहले 15 दिनों के लिए। इसका मतलब है कि यह पूरी तरह से अलग (असामान्य) स्थिति नहीं, बल्कि पिछले रुझानों के अनुरूप अपेक्षाकृत थोड़ा कम दर्ज होने वाला आंकड़ा कहा जा सकता है।
उम्र, लिंग और पैटर्न
नाबालिग (Minor) मामले:
191 नाबालिग लापता हुए, जिनमें बड़ी संख्या किशोर लड़कियों की थी — ये संकेत बता रहे हैं कि युवाओं और विशेषकर लड़कियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है।
लिंग के हिसाब से:
महिलाओं और लड़कियों का हिस्सा काफी अधिक रहा, जो पिछले वर्षों के रुझान को जारी रखता है, जहां महिलाओं की संख्या अक्सर कुल से ज़्यादा होती रही है।
पिछले दशक का ट्रेंड
पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड के अनुसार:
2016 से अब तक लगभग 2,32,737 लोग दिल्ली में लापता रहे, जिनमें से लगभग 1.8 लाख को ढूंढ लिया गया है।
लगभग 52,000 मामले अब भी अनट्रेस्ड हैं, जो बताते हैं कि हर साल दर्ज होने वाले मामलों का एक बड़ा हिस्सा लंबित रहता है।
इस अवधि में किशोरों के लापता होने की दर भी बढ़ी है — हर साल 5,000 से अधिक किशोर लापता होते रहे हैं, जिनमें लगभग 3,500 लड़कियाँ होती हैं।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार, इन आंकड़ों को आश्चर्यजनक कहना गलत होगा, क्योंकि यह लंबे समय से चले आ रहे ट्रेंड का हिस्सा हैं। हालांकि, लड़कियों और नाबालिगों के अनुपात में वृद्धि चिंता का विषय है और इससे यह सवाल उठते हैं कि क्या सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं या नहीं।















