भारत और Sri Lanka के बीच समुद्री सीमा को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ताजा मामले में Sri Lankan Navy ने 10 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया है और उनकी एक ट्रॉलर नाव को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई कथित तौर पर श्रीलंकाई जल क्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में की गई है।
श्रीलंकाई नौसेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह घटना मन्नार के उत्तर में समुद्री इलाके में बुधवार को हुई। नौसेना का कहना है कि भारतीय मछुआरे उनकी सीमा में घुसकर मछली पकड़ रहे थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार मछुआरों और जब्त ट्रॉलर को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
इस साल के आंकड़े इस मुद्दे की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। अब तक श्रीलंकाई नौसेना 16 भारतीय ट्रॉलरों को जब्त कर चुकी है और 112 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, हाल ही में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले थे, जब श्रीलंका ने 30 भारतीय मछुआरों को रिहा कर उन्हें भारत वापस भेज दिया था। इसके बावजूद इस तरह की नई घटनाएं दोनों देशों के संबंधों में तनाव बनाए रखती हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों का मुद्दा वर्षों से विवाद का कारण बना हुआ है। खासकर Palk Strait क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं। यह समुद्री इलाका Tamil Nadu के तट और श्रीलंका के बीच स्थित है और मछली संसाधनों से भरपूर होने के कारण दोनों देशों के मछुआरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक सीमांकन की जटिलताओं और आधुनिक मछली पकड़ने की तकनीकों के कारण मछुआरे अक्सर अनजाने में समुद्री सीमा पार कर जाते हैं। वहीं, कुछ मामलों में जानबूझकर भी सीमाओं का उल्लंघन किया जाता है, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है। श्रीलंकाई नौसेना इस पर सख्त रुख अपनाते हुए नियमित गश्त और कार्रवाई करती है।
इस मुद्दे का मानवीय पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गिरफ्तार मछुआरे अक्सर गरीब परिवारों से आते हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह समुद्र पर निर्भर होती है। गिरफ्तारी के बाद उनके परिवारों को आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करना पड़ता है।
भारत सरकार लगातार यह मांग करती रही है कि मछुआरों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए और उन्हें जल्द रिहा किया जाए। साथ ही, दोनों देशों के बीच इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए बातचीत भी जारी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त निगरानी तंत्र, स्पष्ट सीमांकन और मछुआरों के लिए वैकल्पिक आजीविका जैसे उपाय इस विवाद को कम कर सकते हैं।















