ईरान से जुड़े पश्चिम एशिया के तनाव का असर अब भारत के घरेलू बाजारों में भी दिखने लगा है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर अचानक लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि न तो देश में किसी प्रकार का लॉकडाउन लागू होने जा रहा है और न ही पेट्रोल-डीजल की कोई कमी है।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि युद्ध के कारण भारत में ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इन अफवाहों के चलते लोगों ने घबराकर पेट्रोल और डीजल का अतिरिक्त भंडारण शुरू कर दिया। कई जगहों पर लोग बोतलों और कैनों में भी ईंधन भरवाते नजर आए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
सरकार ने इन खबरों को “भ्रामक और सुनियोजित अफवाह” करार दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में करीब 60 दिनों का ईंधन भंडार मौजूद है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य है।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और कहीं भी आधिकारिक रूप से राशनिंग लागू नहीं की गई है।
हालांकि, कुछ इलाकों में अचानक बढ़ी मांग के कारण अस्थायी दबाव जरूर देखने को मिला। महाराष्ट्र के कुछ शहरों में प्रशासन को स्थिति नियंत्रित करने के लिए सीमित मात्रा में ईंधन देने का फैसला लेना पड़ा, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि असली समस्या सप्लाई की कमी नहीं, बल्कि “पैनिक बायिंग” यानी घबराहट में की गई खरीदारी है। जब लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदते हैं, तो बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो जाती है, जिससे सामान्य उपभोक्ता को परेशानी होती है।
इस बीच, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर देखा जा रहा है। ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण होरमुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ है।
इसके बावजूद भारत ने अलग-अलग देशों से आयात बढ़ाकर अपनी स्थिति मजबूत की है और पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया है।
सरकार ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि घबराकर खरीदारी करने से स्थिति और खराब हो सकती है।















