काबुल में हुए कथित हवाई हमले के बाद पूरे अफगानिस्तान में शोक और आक्रोश का माहौल है। जिस अस्पताल को निशाना बनाए जाने का दावा किया जा रहा है, वह नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज के लिए एक बड़ा केंद्र माना जाता था। घटना के बाद राजधानी के अस्पतालों में घायलों की लंबी कतारें देखी गईं, जबकि कई जगहों पर दवाइयों और डॉक्टरों की कमी भी सामने आई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला देर रात हुआ जब अधिकतर मरीज सो रहे थे। अचानक तेज धमाके और आग की लपटों ने पूरे इलाके को घेर लिया। कई मरीज अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए, जबकि कुछ लोग मलबे में ही दब गए। राहत और बचाव दल ने घंटों तक ऑपरेशन चलाया, लेकिन मलबा ज्यादा होने के कारण काम धीमा पड़ा।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई घायल गंभीर हालत में हैं। वहीं, कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों और घटनास्थल के चक्कर लगा रहे हैं। इस घटना ने पहले से ही संकट झेल रहे अफगानिस्तान के स्वास्थ्य तंत्र पर और दबाव डाल दिया है।
सरकारी अधिकारियों ने इस हमले को “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।















