मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ओमान से एक दुखद घटना सामने आई है। ओमान के सोहर शहर के एक औद्योगिक इलाके में हुए ड्रोन हमले में दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि दस अन्य भारतीय घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना शुक्रवार को हुई और सभी घायलों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
बताया गया कि यह हमला सोहर शहर के अल अवाही इंडस्ट्रियल एरिया में हुआ, जो ओमान की राजधानी मस्कट से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित है। घटना के समय वहां काम कर रहे कई विदेशी श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल थे। हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन हमले में घायल हुए दस भारतीयों का इलाज किया गया और अब उनकी स्थिति स्थिर है। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी है ताकि हमले के कारणों और जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जा सके।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद किसी पश्चिम एशियाई देश की जमीन पर भारतीय नागरिकों की मौत का यह पहला मामला बताया जा रहा है। इस संघर्ष के कारण क्षेत्र में कई जगह ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में हुए हमलों में अब तक तीन दर्जन से अधिक भारतीय घायल हो चुके हैं। इनमें संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएं शामिल हैं। हालांकि अधिकतर मामलों में घायलों को समय पर इलाज मिलने के कारण उनकी जान बचाई जा सकी।
भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन घटना के बाद सक्रिय हो गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता दी जा रही है। साथ ही मृतकों के परिवारों से संपर्क करने और आवश्यक मदद उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वहां काम कर रहे विदेशी श्रमिकों और प्रवासी समुदाय में चिंता का माहौल है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं, इसलिए ऐसी घटनाओं से उनके परिवारों की चिंता भी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर कई देशों तक फैल सकता है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं और औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों तथा रणनीतिक स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।















