प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई CCS बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फोकस वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा और देश के रणनीतिक हितों की रक्षा पर रहा।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण भारतीय नागरिकों में चिंता बढ़ी है। बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर, श्रमिक और कारोबारी पश्चिम एशिया में कार्यरत हैं। ऐसे में सरकार ने दूतावासों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं।
विदेश मंत्रालय ने सलाह जारी करते हुए भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है। साथ ही, स्वैच्छिक पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर निकासी सूची तैयार की जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा भी बैठक का अहम मुद्दा रहा। पश्चिम एशिया भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख स्रोत है। किसी भी तरह की आपूर्ति बाधा का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है। इसलिए वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडार की स्थिति की समीक्षा की गई।
रक्षा मंत्रालय ने भी संभावित आपातकालीन विकल्पों पर प्रस्तुति दी। हालांकि फिलहाल किसी बड़े सैन्य हस्तक्षेप की बात नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।















