सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले से पहले अक्सर बयानबाजी होती है। Mohammad Amir ने भी कहा था कि भारत के लिए नॉकआउट का दबाव चुनौती बन सकता है। लेकिन मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों के चेहरे पर जो आत्मविश्वास था, उसने इस धारणा को कमजोर कर दिया।
कप्तान ने टॉस से लेकर आखिरी ओवर तक शांत दिमाग से फैसले लिए। बल्लेबाजों ने जोखिम जरूर लिया, लेकिन लापरवाही नहीं की। जब रन गति थोड़ी धीमी हुई, तब एक जिम्मेदार साझेदारी ने टीम को संभाला।
दूसरी पारी में गेंदबाजों ने शुरुआत से ही सटीक लाइन-लेंथ रखी। हर ओवर के बाद ऐसा लग रहा था कि टीम अपनी योजना पर डटी हुई है। फील्डिंग में भी ऊर्जा दिखाई दी—एक बेहतरीन कैच और कुछ शानदार रोक ने मैच का संतुलन भारत की ओर झुका दिया।
खेल की खूबसूरती ही यही है कि कागज पर की गई गणना मैदान पर बदल जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ।















