10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लागू करने के फैसले ने अमेरिका की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। Donald Trump ने इसे अमेरिकी कामगारों और उद्योगों के हित में बताया है, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे जल्दबाजी में लिया गया कदम करार दिया है।
ट्रंप का कहना है कि यह नीति घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करेगी। उनके समर्थकों का मानना है कि इससे स्थानीय फैक्ट्रियों को नए अवसर मिलेंगे और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। वे इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का विस्तार बता रहे हैं।
वहीं आलोचकों का तर्क है कि टैरिफ बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। आयातित वस्तुओं की कीमत बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। कई व्यापार संगठनों ने भी चिंता जताई है कि इससे छोटे व्यवसाय प्रभावित हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला आगामी चुनावी माहौल में भी अहम मुद्दा बन सकता है। समर्थक इसे मजबूत नेतृत्व का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे आर्थिक जोखिम मान रहे हैं। अब देखना होगा कि यह नीति दीर्घकाल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कितना फायदा या नुकसान पहुंचाती है।














