आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा जब उसके राज्यसभा के सात सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इनमें प्रमुख नाम राघव चड्ढा का भी शामिल है। बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की तैयारी में हैं, जिससे संसद के उच्च सदन में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से सात ने एक साथ पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। इस कदम को पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद AAP की राज्यसभा में ताकत काफी कमजोर हो सकती है, जबकि BJP की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।
AAP ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि BJP “ऑपरेशन लोटस” के तहत विपक्षी दलों के सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। AAP नेताओं का कहना है कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है। पार्टी ने इसे राजनीतिक खरीद-फरोख्त करार दिया है।
वहीं, BJP की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सांसदों का व्यक्तिगत निर्णय है और वे अपनी इच्छा से पार्टी में शामिल हो रहे हैं। BJP का दावा है कि देश में उसकी नीतियों और नेतृत्व पर विश्वास बढ़ रहा है, जिसके कारण अन्य दलों के नेता भी उससे जुड़ना चाहते हैं।
इस्तीफा देने वाले नेताओं में शामिल राघव चड्ढा ने अपने फैसले को लेकर कहा कि उन्होंने लंबे समय तक AAP के साथ काम किया, लेकिन अब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में पारदर्शिता और ईमानदारी की कमी हो गई है, जिसके चलते उन्होंने अलग रास्ता चुनने का निर्णय लिया।
दूसरी ओर, AAP ने इसे “विश्वासघात” बताते हुए कहा कि यह कदम जनता के जनादेश के खिलाफ है। पार्टी का कहना है कि इन सांसदों ने उस विचारधारा को छोड़ दिया, जिसके आधार पर उन्हें जनता ने चुना था।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। राज्यसभा में संख्या बल के लिहाज से यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे विधेयकों के पारित होने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।














