April 16, 2026

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नोएडा में मजदूरों का आक्रोश बरकरार: वेतन संशोधन के बाद भी प्रदर्शन जारी, सैकड़ों गिरफ्तार

नोएडा: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में संशोधन किए जाने के बावजूद नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को भी शहर के कई इलाकों—सेक्टर 80, 121, 60 और फेज-2—में श्रमिक सड़कों पर उतर आए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखा। स्थिति कई जगहों पर तनावपूर्ण बनी रही, जिसके चलते पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

प्रशासन के अनुसार, अब तक इस मामले में सात एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, जिसके कारण हालात बेकाबू हो गए। सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे कई औद्योगिक इकाइयों को नुकसान पहुंचा।

गौतम बुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान यह संकेत मिले हैं कि कुछ संगठित समूहों ने सुनियोजित तरीके से मजदूरों को उकसाने का काम किया। पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर बनाए गए नए अकाउंट्स के जरिए भ्रामक सूचनाएं फैलाने की भी बात सामने आई है।

दूसरी ओर, प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि सरकार द्वारा घोषित वेतन वृद्धि का उन्हें अब तक कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला है। उनका आरोप है कि फैक्ट्री मालिकों ने नई वेतन दरों को लागू नहीं किया है। नोएडा फेज-2 में काम करने वाले एक श्रमिक ने बताया कि उसकी मासिक आय लगभग ₹13,000 है, जो परिवार के खर्चों के लिए पर्याप्त नहीं है। महंगाई के इस दौर में इतनी कम आय में गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है।

मजदूरों की मुख्य मांग है कि उनका न्यूनतम वेतन कम से कम ₹20,000 प्रति माह किया जाए, ताकि वे अपने परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकें। कई श्रमिकों का कहना है कि उन्हें महीने के बीच में ही पैसों की कमी का सामना करना पड़ता है और मजबूरी में ओवरटाइम या अतिरिक्त काम करना पड़ता है।

इस बीच, प्रशासन लगातार स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल बढ़ा दिया गया है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के जरिए इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें श्रमिकों की जीवन गुणवत्ता, महंगाई और रोजगार की स्थिरता जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार, उद्योग और श्रमिक संगठनों के बीच बेहतर संवाद स्थापित हो, ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके।

Hind News 24x7
Author: Hind News 24x7

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