April 16, 2026

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अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद भारत की विकास रफ्तार कायम, विश्व बैंक का भरोसा बरकरार

वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती दिखा रही है। World Bank की हालिया रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। यह अनुमान दर्शाता है कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रखे हुए है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार मजबूत घरेलू मांग है। बढ़ते शहरीकरण, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और मध्यम वर्ग की आय में वृद्धि ने उपभोग को बढ़ावा दिया है। इसके साथ ही, निर्यात क्षेत्र में स्थिरता ने भी देश की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। यही कारण है कि वित्त वर्ष 2025 में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर के बाद FY26 में यह बढ़कर 7.6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

हालांकि, रिपोर्ट में बाहरी जोखिमों को लेकर चिंता भी जताई गई है। खासकर Iran से जुड़े तनाव और मध्य-पूर्व में संभावित संघर्ष को एक बड़ा खतरा बताया गया है। यदि इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई और चालू खाते के घाटे पर पड़ता है। इससे आम लोगों के खर्च पर भी असर पड़ सकता है और आर्थिक विकास की गति धीमी हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर सरकार वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कटौती करती है, तो इससे उपभोक्ता मांग में तेजी आ सकती है। शुरुआती महीनों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिख सकता है, जिससे बाजार में खरीदारी बढ़ेगी और उद्योगों को फायदा मिलेगा।

विभिन्न संस्थानों के अनुमानों पर नजर डालें तो Reserve Bank of India ने FY27 के लिए 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है, जो विश्व बैंक के अनुमान से थोड़ा अधिक है। वहीं Organisation for Economic Co-operation and Development और Moody’s Ratings ने अपेक्षाकृत कम वृद्धि दर का अनुमान जताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी आर्थिक गति बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना होगा, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना होगा और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना होगा। साथ ही, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान देना भी जरूरी है ताकि बाहरी झटकों का असर कम किया जा सके।

Hind News 24x7
Author: Hind News 24x7

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