हर साल 7 अप्रैल को मनाया जाने वाला World Health Day 2026 इस बार एक बेहद प्रासंगिक मुद्दे पर केंद्रित है। तेजी से फैलती स्वास्थ्य संबंधी गलत जानकारी के बीच इस वर्ष का संदेश साफ है—“विज्ञान के साथ खड़े रहें”। यह थीम ऐसे समय में सामने आई है, जब सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए लोगों तक सही और गलत दोनों तरह की जानकारियां तेजी से पहुंच रही हैं।
आज के डिजिटल दौर में हर व्यक्ति अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह आसानी से प्राप्त कर सकता है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब बिना वैज्ञानिक प्रमाण के दी गई जानकारी को लोग सच मान लेते हैं। कई बार ये गलत सूचनाएं लोगों को ऐसे उपचार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं, जो उनके लिए खतरनाक हो सकते हैं।
World Health Organization (WHO) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि “वेलनेस मिसइन्फॉर्मेशन” यानी स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रामक जानकारी एक वैश्विक चुनौती बन चुकी है। यह न केवल लोगों को भ्रमित करती है, बल्कि सही इलाज से दूर भी कर सकती है। इससे गंभीर बीमारियों के मामले में स्थिति और खराब हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी सलाह को अपनाने से पहले उसकी पुष्टि जरूरी है। केवल वही जानकारी भरोसेमंद होती है, जो वैज्ञानिक शोध और परीक्षणों पर आधारित हो। बिना प्रमाण के फैले घरेलू नुस्खे या सोशल मीडिया ट्रेंड्स पर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
कोविड-19 महामारी के दौरान इसका बड़ा उदाहरण देखने को मिला। उस समय वैक्सीन, दवाइयों और इलाज को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलीं। इन अफवाहों के कारण कई लोगों ने सही समय पर इलाज नहीं लिया या वैक्सीनेशन से दूरी बना ली। इसका असर न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर पड़ा, बल्कि पूरे समाज को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।
इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना है, ताकि वे सही और गलत जानकारी के बीच फर्क कर सकें। इसके लिए जरूरी है कि लोग केवल विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें, जैसे कि सरकारी स्वास्थ्य विभाग, डॉक्टर या मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान।
इसके अलावा, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के लिए खुद से इलाज करने की बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए होती है, उसे इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता।
सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों की भी जिम्मेदारी है कि वे सही जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और गलत सूचनाओं पर नियंत्रण रखें। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी इस दिशा में सख्त कदम उठाने की जरूरत है।















