नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने रणनीतिक और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए रेयर अर्थ मिनरल्स और प्रदूषण नियंत्रण पर खास फोकस किया है। बजट में इन दोनों क्षेत्रों के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं, जिससे देश की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बजट प्रस्तावों के अनुसार, रेयर अर्थ मिनरल्स के घरेलू उत्पादन, प्रोसेसिंग और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए विशेष फंड और प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की जाएंगी। इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में इन खनिजों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने इसे दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बनाया है।
सरकार का मानना है कि रेयर अर्थ सेक्टर में निवेश बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में नई तकनीकों के विकास को गति मिलेगी। इसके साथ ही निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को भी इस क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
बजट 2026 में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया गया है। वायु और जल प्रदूषण को कम करने के लिए स्वच्छ तकनीकों, हरित ईंधन और पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट प्रावधान किए गए हैं। औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और कचरा प्रबंधन योजनाओं को भी बढ़ावा देने की घोषणा की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखा जाए।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में रेयर अर्थ मिनरल्स और प्रदूषण नियंत्रण को एक साथ प्राथमिकता देना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम है। इससे न केवल भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि सतत विकास के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, यूनियन बजट 2026 को तकनीक, पर्यावरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक संतुलित और दूरदर्शी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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