नई दिल्ली: देश में रसोई गैस (LPG) की उपलब्धता को लेकर हालात धीरे-धीरे सामान्य होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कई राज्यों से आ रही रिपोर्ट्स इस तस्वीर को पूरी तरह साफ नहीं करतीं। कुछ जगहों पर जहां उपभोक्ताओं को 1-2 दिन में सिलेंडर मिल रहा है, वहीं कई इलाकों में अब भी लंबा इंतजार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
हाल के हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े तनाव और ईंधन आपूर्ति पर पड़े असर के कारण भारत में LPG वितरण प्रभावित हुआ। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ा। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि उन्हें बुकिंग के बाद 10 से 20 दिन तक इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ मामलों में यह अवधि 30 दिन तक भी पहुंच गई।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से मिले फीडबैक के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में स्थिति कुछ हद तक बेहतर हुई है। गैस एजेंसियों ने डिलीवरी सिस्टम को तेज करने का दावा किया है, जिससे अब कई शहरों में 2-3 दिन के भीतर सिलेंडर उपलब्ध हो रहा है। हालांकि, यह सुधार हर जगह समान रूप से नहीं दिख रहा।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अब भी आपूर्ति की रफ्तार धीमी है। वहां रहने वाले लोगों को न सिर्फ ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है, बल्कि कई बार उन्हें खुद एजेंसी जाकर सिलेंडर लाना पड़ता है। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि LPG सप्लाई चेन कई कारकों पर निर्भर करती है—जैसे आयात, परिवहन, भंडारण और स्थानीय वितरण। इनमें से किसी एक कड़ी में भी बाधा आने पर पूरी व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। हाल ही में मांग में अचानक आई बढ़ोतरी और परिवहन संबंधी दिक्कतों ने इस समस्या को और बढ़ाया।
तेल कंपनियों का कहना है कि वे स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। अतिरिक्त स्टॉक तैयार किया जा रहा है और डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बुकिंग और ट्रैकिंग की सुविधा देकर पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है।
इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर लोगों की शिकायतें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कई उपभोक्ता अब भी समय पर सिलेंडर न मिलने से परेशान हैं, खासकर तब जब घर में कोई बड़ा आयोजन या जरूरत सामने आ जाए।















